बदायूँ । देश में 21 दिन का लॉक डाउन चल रहा है, शहरों से पैदल ही गांव की ओर पलायन कर रहे लोगों का प्रशासन खाने पीने का इंतजाम कर रहा, रजिस्टर्ड मजदूरों को सहायता राशि दी जा रही है, लेकिन बदायूं में झुग्गी झोपड़ी में कूड़ा बीन कर गुजारा करने वाले परिवारों को देखने वाला कोई नहीं है। और वह भूखे रहने को मजबूर हैं।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश मे 21 का लॉक डाउन चल रहा है, ऐसे में शहरों से गांव की ओर आ रहे लोगों को प्रशासन घर छुड़वाने से लेकर खाने का भी इंतजाम कर रहा है। साथ ही रजिस्टर्ड मजदूरों के खाते में भी सहायता राशि भेजी जा रही है। लेकिन बदायूं शहर में झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले कूड़ा बीनने वाले दर्जनों परिवार की कोई सुध लेने वाला नहीं। ऐसे में यह लोगों भूखे रहने को मजबूर हैं। यह लोग न तो रजिस्टर्ड मजदूर हैं और न ही दिल्ली से पैदल लौटने वाली भीड़ में शामिल इसकी वजह इनकी ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है।
दरअसल यह लोग कूड़ा बीनकर अपना परिवार का गुजरा करते हैं लॉक डाउन होने के बाद अब इन कूड़ा बीनने बालों को रोजी रोटी के लिए परेशान होना पड़ रहा है उनका कहना है कि उन लोगों को पुलिस कूड़ा नहीं बीनने दे रही है और न ही प्रशासन या समाजसेवी मदद को आगे आ रहे। ऐसी स्थिति में इन लोगों का भगवान ही मालिक है।

