अंधेर नगरी चौपट राजा ये मुहावरा बदायूं पुलिस पर एक दम सटीक बैठता है , हम यूं ही ऐसे नहीं कह रहे है …पुलिस ने एक बार फिर से ऐसा कारनामा किया है , जो एक दम अद्भुत अविश्वसनीय और अकल्पनीय है, ऐसा लगता है कि बदायूं पुलिस ने ना सुधरने की कसम खा रखी है या फिर वो इस फंडे पर चल रही है जो जितना बदनाम होगा उसका उतना नाम होगा …कभी 10 साल के बच्चे को 23 साल दिखाकर मुकदमा दर्ज़ कर देती है …अब पुलिस ऐसा कारनामा कर दिया है जिसे सुनकर सभी हैरान है ..उसहैत पुलिस ने 3 साल पहले मर चुके इंसान पर मुक़दमा दर्ज़ कर दिया है …दरअसल 1 हफ्ते पहले रिजौला गांव में गायों की मौत को लेकर गांव के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की थी ,जिसमे पुलिस ने सचिव के द्वारा दी गयी तहरीर के हिसाब से 32 लोगों नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था , जिसमे 3 साल पहले मर चुके हरपाल का भी नाम शामिल था ।
मामला जिले के उसहैत थाना क्षेत्र के रिजौला गांव का है । यहां करीब 15 दिन पहले रिजौला गांव में घुमंतू गायों के शव मिलने समेत गायों द्वारा फसलों को नष्ट करने के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की थी । उस वक्त तो किसी तरह ग्रामीणों को समझाकर घर भेज दिया गया लेकिन बाद में इस मामले की तहरीर सचिव ने पुलिस को दी। तहरीर में 32 लोगों के नाम शामिल थे आनन-फानन में पुलिस ने तहरीर के आधार पर गांव वालों के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन व नारेबाजी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया । जिसमें गांव के हरपाल का नाम भी शामिल था । पुलिस ने जब हरपाल की तलाश शुरू की तो परिजनों को मृतक के नाम मुकदमा दर्ज होने की जानकारी हुई। मृतक हरपाल के घरवालों ने बताया, हरपाल की मौत को तीन साल हो चुके हैं । वहीं ग्रामीणों का आरोप है राजनीति के चलते सचिव के जरिए मुकदमा कराया है जबकि हकीकत यह है । अब अदालत की शरण में जाएंगे।
मामले में एसपी सिटी जितेंद श्रीवास्तव का कहना है कि मामले में पुलिस ने अपनी ओर से कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है । वादी ने जो तहरीर दी थी पुलिस ने उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया । अगर कोई व्यक्ति मृतक है और उसके खिलाफ केस दर्ज है तो विवेचना में नाम निकाल दिया जाता है । ऐसी कोई गलती त्रुटि की वजह हुई होगी ।

